16 Best प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में-Inspirational Stories In Hindi


दोस्तों आज में आपके बच्चों के लिए कुछ 16 Best प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में  लेकर आई हूँ जो न केवल आपके बच्चोंको अच्छी शिक्षा देंगीबल्कि उनको जीवन मेसफलता दिलवाने में भी मदद करेंगी | 

   दोस्तों जब हम बच्चों के लिए कहानियों की बात करतें है  तो हर कहानी अपने आप में कोई न कोई सीख या प्रेरणा लिए होती है। वहीं, जब हम सिर्फ प्रेरणादायक कहानी की बात करते हैं, तो ऐसे में केवल उन कहानियों को शामिल किया जाता है, जिनसे बच्चों को जीवन में अच्छे कर्म और व्यवहार की प्रेरणा मिले। कुछ ऐसी ही व्यवहारिक सीख देने वाली  कहानियांआपको यहाँ पर मिलेगी | 

कुछ प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में जो आपके जीवन को सफल बनाने में मदद करेगीं|

15 Best प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में-Inspirational Stories In Hindi

ये कहानियां आपके बच्चे की बुद्धि का विकास करने में तो मदद करेंगी ही, साथ ही इनकी मदद से उन्हें जीवन में अच्छे और बुरे के बीच का अंतर समझने में भी मदद मिलेगी। इतना ही नहीं ये कहानियां बच्चों को बड़ों का आदर, मित्रों से अच्छा व्यवहार व लोगों के प्रति विनम्रता का पाठ भी पढ़ाएंगी। यह पाठ न सिर्फ बचपन में, बल्कि युवावस्था में भी उनका मार्गदर्शन करेगा।


1. एक पाउंड मक्खन (ईमानदारी) -A Pound of Butter (Honesty) Story In Hindi


एक किसान था जो एक बेकर को एक पाउंड मक्खन बेचता था। एक दिन बेकर ने यह देखने के लिए मक्खन तौलने का फैसला किया कि क्या उसे सही मात्रा मिल रही है, जो उसे नहीं मिल रही थी। इससे नाराज होकर वह किसान को कोर्ट ले गया।

न्यायाधीश ने किसान से पूछा कि क्या वह मक्खन को तौलने के लिए किसी उपाय का उपयोग कर रहा है। किसान ने उत्तर दिया, “माननीय, मैं आदिम हूँ। मेरे पास उचित माप नहीं है, लेकिन मेरे पास एक पैमाना है।"

न्यायाधीश ने पूछा, "तो फिर तुम मक्खन कैसे तौलते हो?"

किसान ने उत्तर दिया;

"महाराज, बहुत पहले से ही बेकर ने मुझसे मक्खन खरीदना शुरू किया था, मैं उससे एक पाउंड की रोटी खरीद रहा था। हर दिन जब बेकर रोटी लाता है, तो मैं इसे पैमाने पर रखता हूं और मक्खन में उतना ही वजन देता हूं। अगर किसी को दोष देना है, तो वह बेकर है। ”

कहानी की शिक्षा:

जीवन में आपको वही मिलता है जो आप देते हैं। कोशिश मत करो और दूसरों को धोखा दो।

2. हमारे रास्ते में बाधा (अवसर) - The Obstacle In Our Path (Opportunity) Story In Hindi

प्राचीन काल में, एक राजा के पास सड़क पर एक शिलाखंड था। फिर वह छिप गया और देखता रहा कि क्या कोई पत्थर को रास्ते से हटाएगा। राजा के कुछ सबसे धनी व्यापारी और दरबारी आए और बस उसके चारों ओर चले गए।

बहुत से लोगों ने राजा पर सड़कों को साफ न रखने का आरोप लगाया, लेकिन उनमें से किसी ने भी पत्थर को रास्ते से हटाने के लिए कुछ नहीं किया।

तभी एक किसान सब्जियों का भार लेकर आया। शिलाखंड के पास पहुंचने पर किसान ने अपना बोझ डाला और पत्थर को सड़क से बाहर धकेलने की कोशिश की। काफी मशक्कत और मशक्कत के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली।

जब किसान अपनी सब्जियां लेने वापस गया, तो उसने देखा कि सड़क पर एक पर्स पड़ा है, जहां पत्थर पड़ा था।

पर्स में कई सोने के सिक्के और राजा का एक नोट था जिसमें बताया गया था कि सोना उस व्यक्ति के लिए था जिसने सड़क से बोल्डर को हटाया था।

कहानी की शिक्षा:

जीवन में हमारे सामने आने वाली हर बाधा हमें अपनी परिस्थितियों में सुधार करने का अवसर देती है, और जबकि आलसी शिकायत करते हैं, दूसरे अपने दयालु हृदय, उदारता और चीजों को प्राप्त करने की इच्छा के माध्यम से अवसर पैदा कर रहे हैं।

3.अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें (क्रोध) - Control Your Temper (Anger) Story In Hindi

एक बार एक छोटा लड़का था जिसका मिजाज बहुत खराब था। उसके पिता ने उसे कीलों का एक थैला सौंपने का फैसला किया और कहा कि हर बार लड़के ने अपना आपा खो दिया, उसे बाड़ में एक कील ठोकनी पड़ी।

पहले दिन लड़के ने उस बाड़ में 37 कील ठोक दी।

अगले कुछ हफ्तों में लड़के ने धीरे-धीरे अपने गुस्से को नियंत्रित करना शुरू कर दिया, और बाड़ में ठोके गए कीलों की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई।

उन्होंने पाया कि उन कीलों को बाड़ में ठोकने की तुलना में अपने गुस्से को नियंत्रित करना आसान था।

आखिरकार वो दिन आ ही गया जब लड़के ने अपना आपा बिल्कुल भी नहीं खोया। उसने अपने पिता को खबर सुनाई और पिता ने सुझाव दिया कि लड़के को अब हर दिन एक कील निकालनी चाहिए, वह अपना गुस्सा नियंत्रण में रखता है।

दिन बीतते गए और लड़का आखिरकार अपने पिता को बता पाया कि सभी नाखून चले गए हैं। पिता ने अपने पुत्र का हाथ पकड़ कर बाड़े में ले गया।

"तुमने अच्छा किया है, मेरे बेटे, लेकिन बाड़ में छेदों को देखो। बाड़ कभी भी एक जैसी नहीं होगी। जब आप गुस्से में कुछ कहते हैं, तो वे इस तरह एक निशान छोड़ जाते हैं। आप एक आदमी में चाकू डाल सकते हैं और उसे बाहर निकाल सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी बार कहते हैं कि मुझे खेद है, घाव अभी भी है। ”

कहानी की शिक्षा:

अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें, और इस समय लोगों से ऐसी बातें न कहें, जिससे आपको बाद में पछताना पड़े। जीवन में कुछ चीजें, आप वापस नहीं ले सकते।

4.एक अंधी लड़की  The Blind Girl Story In Hindi

एक अंधी लड़की थी जो खुद से पूरी तरह से इस बात से नफरत करती थी कि वह अंधी थी। एकमात्र व्यक्ति जिससे वह नफरत नहीं करती थी, वह उसका प्यार करने वाला प्रेमी था, क्योंकि वह हमेशा उसके लिए था। उसने कहा कि अगर वह केवल दुनिया देख सकती है, तो वह उससे शादी करेगी।

एक दिन, किसी ने उसे एक जोड़ी आंखें दान कर दीं - अब वह अपने प्रेमी सहित सब कुछ देख सकती थी। उसके प्रेमी ने उससे पूछा, "अब जब तुम दुनिया देख सकती हो, तो क्या तुम मुझसे शादी करोगी?"

जब उसने देखा कि उसका प्रेमी भी अंधा है, तो लड़की चौंक गई और उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। उसका प्रेमी आंसुओं में चला गया, और बाद में उसे यह कहते हुए एक पत्र लिखा:

"बस मेरी आँखों का ख्याल रखना प्रिय।"

कहानी की शिक्षा:

जब हमारी परिस्थितियाँ बदलती हैं, तो हमारा मन भी बदलता है। हो सकता है कि कुछ लोग पहले जैसी चीज़ों को देखने में सक्षम न हों, और शायद उनकी सराहना करने में सक्षम न हों। इस कहानी से एक ही नहीं, बहुत सी बातें दूर करने हैं।

5.टीनू और चिड़िया के घोंसले की कहानी - Tinu and Bird of Nest Story In Hindi

एक समय की बात है, टीनू नाम की लड़की थी जो स्कूल में दिए गए कार्यों में बड़ी रुचि रखती थी। इस साल टीनू के स्कूल में गर्मी की छुट्टियां पड़ने से पहले उसकी टीचर ने सभी को विभिन्न पक्षियों के चित्र दिखाकर चिड़िया पर निबंध लिखने के लिए कहा था। सभी बच्चों को स्कूल खुलते ही निबंध टीचर को दिखाना था।

पक्षियों की रंग-बिरंगी किताब टीनू को बहुत पसंद थी। जब टीचर ने बताया कि उन पर निबंध लिखना है और सबसे अच्छा लिखने वाले को इनाम में वह किताब मिलेगी, तो टीनू खुश हो गई। टीचर ने सभी पक्षियों से जुड़ी कुछ कहानियाँ भी बच्चों को सुनाई। उसके बाद स्कूल की गर्मियों की छुट्टियाँ पड़ गईं।

यूँ तो टीनू हर साल अपनी गर्मी की छुट्टियाँ बिताने के लिए कहीं-न-कही जाती थी। लेकिन इस साल की छुट्टियों में टीनू रोज़ पास के ही बगीचे में जाकर पक्षियों और उनके घोंसले देखने लगी।

उस बगीचे में गोरैया, दर्जिन, लवा जैसे बहुत-से पक्षी आते थे। टीनू बगीचे में आने वाली हर चिड़िया को पहचानने की कोशिश करती और उन्हें ग़ौर देखती रहती।

टीनू देखती थी कि हर चिड़िया एक-एक घास, पत्ती, पंख, आदि को जोड़कर कैसे अपना घोंसला बना रही है। उसके मन में होता था कि चिड़िया को घोंसला बनाने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है। टीनू चाहती थी कि वो किसी तरह से उन पक्षियों की मदद करे।

एक दिन टीनू ने देखा कि पास के बगीचे में बदमाश लड़कों ने लवा चिड़ियों का घोंसला तोड़ दिया है। टीनू को यह देखकर बहुत दुख हुआ। उसने सोचा कि क्यों न मैं इनके लिए खुद एक-दो घोंसले बना दूँ। शायद ये इसका इस्तेमाल कर लेंगीं।

टीनू को लगा कि वो कुछ ही देर में घोंसला बनाकर तैयार कर देगी। लेकिन टीनू पूरा दिन तिनकों और दूसरी चीज़ों से चिड़िया का घोंसला बुनती रही। बड़ी मुश्किल से जब घोंसला तैयार हुआ, तो घोंसले को पेड़ पर टिकाने के लिए कुछ मिला नहीं।

टीनू की माँ यह सब देख रही थी। तभी टीनू ने माँ को बताया, “देखिए न, मैंने चिड़िया के लिए एक घोंसला बनाया है। मगर यह उतना सुंदर नहीं है, जितना चिड़िया बनाती हैं। मैंने सोचा था आसानी से एक सुंदर घोंसला बन जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यह घोंसला अंदर से काफी कठोर बन गया है। क्या आप इसे मुलायम बना देंगी?”

किसी तरह से टीनू की माँ ने उस घोंसले को थोड़ा ठीक किया। उसके बाद टीनू ने उस घोंसले को धागे की मदद से पेड़ पर टिका दिया।

अब बगीचे में बैठकर टीनू लवा पक्षी के आने का इंतज़ार करने लगी। वो पक्षी बगीचे में आए तो, लेकिन टीनू द्वारा बनाया गया घोंसला उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया। टीनू के साथ उसकी माँ भी बगीचे में आई थी, उसने टीनू को उदास देखकर कहा, “तुम परेशान मत होना, अभी चिड़िया घोंसले पर आ जाएगी।”

तभी एक लवा पक्षी ने आकर टीनू द्वारा बनाए गए घोंसले को तोड़ दिया। अब टीनू ने मुँह लटका लिया। तब उसे उसकी माँ ने समझाया कि तुम्हें दुखी नहीं होना चाहिए। देखो, तुम्हारे द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों से ही लवा पक्षी अपने लिए घोंसला बना रहे हैं। हो सकता है कि इन्हें दूसरों का बनाया हुआ घोंसला पसंद नहीं आता हो।

दुखी मन से टीनू ने कहा, “माँ मैं अपने स्कूल के निबंध में यह सबकुछ लिखूंगी।”

कुछ देर बाद टीनू ने कहा, “माँ आपने देखा कि लवा पक्षी अपना घर झाड़ियों में बना रहे हैं।”

जवाब में टीनू की माँ बोली, “हाँ बेटा, मैंने सुना था कि लवा पक्षी अपना घोंसला किसी के घर के रोशनदान या पेड़ पर ही बनाते हैं। आज यह नई बात पता चली है।”

कुछ और दिनों बाद टीनू ने लवा पक्षियों के बारे में एक और बात जानी कि वो सीधे उड़कर अपने घोंसले में नहीं जाते। घोंसले से कुछ दूर ठहरकर इधर-उधर कूदते हुए वो अपने घोंसले तक पहुँचते हैं, ताकि किसी को उनके घोंसले का पता न चले।

थोड़े ही दिनों में स्कूल की गर्मियों की छुट्टियाँ खत्म हो गईं। टीनू ने स्कूल जाकर लवा पक्षी के बारे में लिखा और निबंध प्रतियोगिता जीत ली। ईनाम में मनपसंद चिड़ियों वाली किताब मिलने पर टीनू खुश हो गई।

प्रतियोगिता जितने के बाद भी टीनू रोज़ चिड़ियों की चहचहाहट सुनने के लिए उस बगीचे में जाकर घंटों बैठती है। मानो उसकी चिड़ियों के साथ दोस्ती हो गई हो।

कहानी से सीख:

चिड़िया के घोंसले की कहानी से यह सीख मिलती है कि छोटी-छोटी बात पर मन दुखी नहीं करना चाहिए। साथ ही आसपास की चीज़ों पर ग़ौर करने से हमें काफ़ी कुछ नया जानने को मिलता है।

6.गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी - बुद्ध, आम और बच्चे की कहानी

बात उस समय की है जब महात्मा गौतम बुद्धा एक आम के बगीचे में विश्राम कर रहे थे। तभी वहां खेलते हुए बच्चों की एक टोली आ गयी। सभी बच्चे आम का बगीचा देख कर, आम तोड़ने के लिए वहीं रुक गये।

बच्चों ने आम तोड़ने के लिए आम के पेड़ पर पत्थर मरना शुरू किया। देखते ही देखते जमीन पर आमों का ढेर लग गया।

इतने में एक बच्चे ने थोड़े ऊंचे आम को तोड़ने के लिए एक पत्थर ज्यादा तेज फेंका। वह पत्थर विश्राम कर रहे महात्मा जी को जा कर लगा और उनके माथे से खून आने लगा। सभी बच्चे यह देख कर बहुत डर गए। उन्हें लगा अब तो बुद्धा जी उनको बहुत डाटेंगे।

तभी उनमे से एक बालक डरता हुआ महात्मा जी के पास गया और उनसे हाथ जोड़ते हुए बोला, हे महात्मा! हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है। हमें क्षमा कर दीजिए। हमारी वजह से आपको यह पत्थर लग गया और आपके माथे से खून आ गया।

इस बात को सुन कर, महात्मा बुद्धा ने बच्चों से कहा, मुझे इस बात का दुख नहीं है की मुझे पत्थर लगा। पर दुख इस बात का है की पेड़ को पत्थर मारने से पेड़ तुम्हे मीठे फल देता है। लेकिन मुझे पत्थर मारने से तुम्हे डर मिला।

इस तरह अपनी बात पूरी कर के महात्मा जी आगे चल दिए। और बच्चे भी आम बटोर कर वापस अपने अपने घर चले गए।

कहानी से सीख :

इस कहानी के माध्यम से महात्मा गौतम बुद्धा हमें बताना चाहते है कि, कोई अगर हमारे साथ बुरा व्यव्हार करता है, तब भी हमे उसके साथ अच्छा व्यव्हार ही करना चाहिए। जिस प्रकार पेड़ को पत्थर मारने पर भी वह बदले में मीठे फल ही देता है उसी प्रकार हमे भी सभी के साथ मधुर व्यव्हार रखना चाहिए।

7.एक गुब्बारे वाला - A Balloonist

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था.  वह गाँव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता . बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता …लाल, पीले ,हरे, नीले…. और जब कभी उसे लगता की बिक्री कम हो रही है वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता, जिसे उड़ता देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुँच जाते.

इसी तरह तरह एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था. पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा ये सब बड़ी जिज्ञासा के साथ देख रहा था . इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफ़ेद गुब्बारा उड़ाया वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला, ” अगर आप ये काल वाला गुब्बारा छोड़ेंगे…तो क्या वो भी ऊपर जाएगा ?”

गुब्बारा वाले ने थोड़े अचरज के साथ उसे देखा और बोला, ” हाँ  बिलकुल जाएगा.  बेटे ! गुब्बारे का ऊपर जाना  इस बात पर नहीं निर्भर करता है कि वो किस रंग का है बल्कि इसपर निर्भर करता है कि उसके अन्दर क्या है .”

कहानी से सीख :

दोस्तों ठीक इसी तरह हम इंसानों के लिए भी ये बात लागु होती है. कोई अपनी life में क्या achieve करेगा, ये उसके बाहरी रंग-रूप पर नहीं depend करता है , ये इस बात पर depend करता है कि उसके अन्दर क्या है. अंतत: हमारा attitude हमारा altitude decide करता है |

8.ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत -Stones, Pebbles and Sands of Life Story In Hindi

Philosophy के एक प्रोफ़ेसर ने कुछ चीजों के साथ class में प्रवेश किया. जब class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाली शीशे का जार लिया और उसमे पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे. फिर उन्होंने students से पूछा कि क्या जार भर गया है ? और सभी ने कहा “हाँ”.

तब प्रोफ़ेसर ने छोटे-छोटे कंकडों से भरा एक box लिया और उन्हें जार में भरने लगे. जार को थोडा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए. एक बार फिर उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है?  और सभी ने हाँ में उत्तर दिया.

तभी professor ने एक रेत  का box निकाला और उसमे भरी रेत को जार में डालने लगे. रेत ने बची-खुची जगह भी भर दी. और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने एक साथ उत्तर दिया , ” हाँ”

फिर professor ने समझाना शुरू किया, ” मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपकी life को represent करता है. बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूरी चीजें हैं- आपकी family,आपका partner,आपकी health, आपके बच्चे – ऐसी चीजें कि अगर आपकी बाकी सारी चीजें खो भी जाएँ और सिर्फ ये रहे तो भी आपकी ज़िन्दगी पूर्ण रहेगी.

9. हाथी और छह अंधे व्यक्ति - The Elephant and the Six Blind Person Story In Hindi



बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.”  उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था|

 सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”,  पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.

“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.

“मैं बताता हूँ,  ये तो पेड़ के तने की तरह है.”,  तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी  एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.

” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी.

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी  बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे.

तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया.

और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए

हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.

दोस्तों,  कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी  बात को लेकर अड़ जाते हैं कि हम ही सही हैं और बाकी सब गलत है. लेकिन यह संभव है कि हमें सिक्के का एक ही पहलु दिख रहा हो और उसके आलावा भी कुछ ऐसे तथ्य हों जो सही हों. इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए , और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए. वेदों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है. तो , जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ पूँछ  है और बाकी हिस्से  किसी और के पास हैं|

10.सफलता का रहस्य -Secret of Success Story in Hindi

सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो. वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया.

लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना.

सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”

लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”

सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना  चाहते थे  तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

दोस्तों, जब आप सिर्फ और सिर्फ एक चीज  को बार-बार चाहते हैं…वो चीज आपको मिल जाती है. जैसे छोटे बच्चों को देख लीजिये वे न past में जीते हैं न future में, वे हमेशा present में जीते हैं…और जब उन्हें खेलने के लिए कोई खिलौना चाहिए होता है या खाने के लिए कोई टॉफ़ी चाहिए होती है…तो उनका पूरा ध्यान, उनकी पूरी शक्ति बस उसी एक चीज को पाने में लग जाती है and as a result वे उस चीज को पा लेते हैं|

 कहानी से  शिक्षा:

 इसलिए सफलता पाने के लिए FOCUS बहुत ज़रूरी है, सफलता को पाने की जो चाहता है उसमे intensity होना बहुत ज़रूरी है..और जब आप वो फोकस और वो इंटेंसिटी पा लेते हैं तो सफलता आपको मिल ही जाती है|

11. फूटा घड़ा Broken Pot Story in Hindi

बहुत  समय  पहले  की  बात  है  , किसी  गाँव  में  एक   किसान  रहता  था . वह  रोज़   भोर  में  उठकर  दूर  झरनों  से  स्वच्छ  पानी  लेने  जाया   करता  था . इस  काम  के  लिए  वह  अपने  साथ  दो  बड़े  घड़े  ले  जाता  था , जिन्हें  वो  डंडे  में   बाँध  कर  अपने कंधे पर  दोनों  ओर  लटका  लेता  था|

उनमे  से  एक  घड़ा  कहीं  से  फूटा  हुआ  था  ,और  दूसरा  एक  दम  सही  था . इस  वजह  से  रोज़  घर  पहुँचते -पहुचते  किसान  के  पास  डेढ़  घड़ा   पानी  ही बच  पाता  था .ऐसा  दो  सालों  से  चल  रहा  था .

सही  घड़े  को  इस  बात  का  घमंड  था  कि  वो  पूरा  का  पूरा  पानी  घर  पहुंचता  है  और  उसके  अन्दर  कोई  कमी  नहीं  है  ,  वहीँ  दूसरी  तरफ  फूटा  घड़ा  इस  बात  से  शर्मिंदा  रहता  था  कि  वो  आधा  पानी  ही  घर  तक  पंहुचा   पाता  है  और  किसान  की  मेहनत  बेकार  चली  जाती  है .   फूटा घड़ा ये  सब  सोच  कर  बहुत  परेशान  रहने  लगा  और  एक  दिन  उससे  रहा  नहीं  गया , उसने  किसान   से  कहा , “ मैं  खुद  पर  शर्मिंदा  हूँ  और  आपसे  क्षमा  मांगना  चाहता  हूँ ?”

“क्यों  ? “ , किसान  ने  पूछा  , “ तुम  किस  बात  से  शर्मिंदा  हो ?”

“शायद  आप  नहीं  जानते  पर  मैं  एक  जगह  से  फूटा  हुआ  हूँ , और  पिछले  दो  सालों  से  मुझे  जितना  पानी  घर  पहुँचाना  चाहिए  था  बस  उसका  आधा  ही  पहुंचा  पाया  हूँ , मेरे  अन्दर  ये  बहुत बड़ी  कमी  है , और  इस  वजह  से  आपकी  मेहनत  बर्वाद  होती  रही  है .”, फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा.

किसान  को  घड़े  की  बात  सुनकर  थोडा  दुःख  हुआ  और  वह  बोला , “ कोई  बात  नहीं , मैं  चाहता  हूँ  कि  आज  लौटते  वक़्त  तुम   रास्ते में  पड़ने  वाले  सुन्दर  फूलों  को  देखो .”

घड़े  ने  वैसा  ही  किया , वह  रास्ते  भर  सुन्दर  फूलों  को  देखता  आया , ऐसा करने से  उसकी  उदासी  कुछ  दूर  हुई  पर  घर  पहुँचते – पहुँचते   फिर  उसके  अन्दर  से  आधा  पानी  गिर  चुका  था, वो  मायूस  हो  गया  और   किसान  से  क्षमा  मांगने  लगा .

किसान  बोला ,” शायद  तुमने  ध्यान  नहीं  दिया  पूरे  रास्ते  में  जितने   भी  फूल  थे  वो  बस  तुम्हारी  तरफ  ही  थे , सही  घड़े  की  तरफ  एक  भी  फूल  नहीं  था . ऐसा  इसलिए  क्योंकि  मैं  हमेशा  से  तुम्हारे  अन्दर  की  कमी को   जानता  था , और  मैंने  उसका  लाभ  उठाया . मैंने  तुम्हारे  तरफ  वाले  रास्ते  पर   रंग -बिरंगे  फूलों के  बीज  बो  दिए  थे  , तुम  रोज़  थोडा-थोडा  कर  के  उन्हें  सींचते  रहे  और  पूरे  रास्ते  को  इतना  खूबसूरत  बना  दिया . आज तुम्हारी  वजह  से  ही  मैं  इन  फूलों  को  भगवान  को  अर्पित  कर  पाता  हूँ  और   अपना  घर  सुन्दर  बना  पाता  हूँ . तुम्ही  सोचो  अगर  तुम  जैसे  हो  वैसे  नहीं  होते  तो  भला  क्या  मैं  ये  सब  कुछ  कर  पाता ?”

 कहानी  से  शिक्षा:

 दोस्तों  हम  सभी  के  अन्दर  कोई  ना  कोई  कमी  होती है  , पर यही कमियां हमें अनोखा  बनाती हैं . उस किसान की  तरह  हमें  भी  हर  किसी  को  वो  जैसा  है  वैसे  ही स्वीकारना चाहिए  और  उसकी  अच्छाई  की  तरफ  ध्यान  देना  चाहिए, और जब हम ऐसा करेंगे तब “फूटा घड़ा” भी “अच्छे घड़े” से मूल्यवान हो जायेगा|

12.एक केकड़े कि प्रेरणादायक कहानी – Inspirational story of a crab in Hindi

एक बार एक केकड़ा था। एक दिन वह समुंद्र के किनारे अपनी मस्ती में चल रहा था और कभी कभी पीछे मुड़कर अपने पैरों के निशान देखकर खुश हो रहा था।

इसी प्रकार वह आगे बढ़ता है और अपने पैरों के निशान देखता है और खुश होता रहता है। थोड़ी देर बाद समुंद्र से एक लहर आती है और उस केकड़े के पैरों के सारे निशान मिटा देती है।

यह देखकर केकड़े को गुस्सा आ गया और उसने समुंद्र की लहरों से कहा ऐ लहर तुम तो मुझे अपना दोस्त मानती हो फिर क्यों मेरे सुंदर पैरों के निशानों को मिटा रही हो। ऐसे कैसे दोस्त हो तुम मेरे।

तब लहर ने जवाब दिया वो देखो तुम्हारे पीछे मछुवारों का झुंड आ रहा है जो पैरों के निशान देखकर ही केकड़ों को पकड़ रहे है… है दोस्त कहीं वो मछुआरे तुम को न पकड़ ले इसीलिए में तुम्हारे पैरों के निशानों को मिटा रहा हूं।

कहानी से शिक्षा: 

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हम कई बार सामने वालों कि बातें समझ नही पाते है और अपनी सोच के अनुसार उसे गलत समझ लेते है।

दोस्तों हर सिक्के के दो पहलू होते है इसलिए मन में बैर लाने से अच्छा है कि हम हर बात का सोच समझ कर मतलब निकाले।

13.एक साधु - A Monk Story in Hindi

एक बार एक साधु एक दुकान पर गया। उस दुकान में बहुत सारे छोटे छोटे डिब्बों में सामान रखा हुआ था। एक डिब्बें कि ओर साधु ने इशारा किया और दुकानदार से पूछा इसमें क्या है ? दुकानदार ने कहा इसमें चीनी है।

इसके बाद साधु ने दूसरे डिब्बें की ओर इशारा करके पूछा इसमें क्या है ? तो दुकानदार ने कहा इसमें दाल है।

इसी तरह वह साधु डिब्बों के बारे में पूछते गए और दुकानदार बताता गया। अंत में पीछे वाले डिब्बें का नंबर आया तो साधु ने पूछा उस अंत वाले डिब्बें में क्या है ? तो दुकान वाला बोला उसमे राम राम है।

फिर साधु ने पूछा ये Ram Ram क्या चीज है ? तो उस दुकानदार ने कहा बाबा सभी डिब्बों में कुछ न कुछ चीज है लेकिन यह डिब्बा खाली है और हम खाली को खाली ने कहकर राम राम कहते है।

यह सब सुनकर साधु को आश्चर्य हुआ और कहा अच्छा तो खाली में राम रहता है। भरे हुए में राम को स्थान कहां ?

कहानी से शिक्षा: 

इस तरह दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लोभ, लालच, ईर्ष्या, दोष और भली बुरी बातों से जब हमारा दिल और दिमाग भरा रहेगा तो उसमे भगवान का वास कैसे होगा। राम यानी भगवान तो खाली यानी साफ-सुथरे मन में ही निवास करते है।

14.एक बच्ची - A Baby Girl Story In Hindi

एक बार एक व्यक्ति अपनी नई नई कार को धो रहा था। तभी उसकी पांच साल की बेटी वहां पर आ गई और कार पर पत्थर के टुकड़े से खरोंच करने लग गई।

यह देखकर उसके पिता को गुस्सा आया और लड़की का हाथ पकड़कर जोर से मरोड़ दिया जिससे उस बच्ची की अंगुलियों में फेक्चर हो जाता है तो वह बच्ची दर्द से रोने लगती है।

इसके बाद वह व्यक्ति अपनी बच्ची को डॉक्टर के पास लेकर गया तो वहीं दर्द से कहराते हुए बच्ची ने अपने पापा से पूछा – पापा मेरी अंगुलिया कब सही होगी।

यह सुनकर वह व्यक्ति कोई जवाब नही दे पाया और अपनी गलती पर पछताता रहा और वापस आकर कार पर लात मारकर गुस्सा निकालने लगा।

तभी उसकी नजर उस खरोंच पर पड़ी जो उसकी बेटी ने किया था। उस लड़की ने वहां पर लिखा था – आई लव यू पापा।

कहानी से शिक्षा: 

दोस्तों गुस्सा और प्यार की कोई सीमा नही होती है। हमेशा यह याद रखे कि चीजे इस्तेमाल के लिए होती है और इंसान प्यार करने के लिए। लेकिन होता इससे उल्टा है। लोग चीजों से प्यार करते है और लोगों का इस्तेमाल करते है।

15.उबलता पानी और मेंढक - Boiling Water and Frog Story In Hindi 

एक बार वैज्ञानिकों ने शारीरिक बदलाव की क्षमता की जांच के लिए एक शोध किया. शोध में एक मेंढक लिया गया और उसे एक कांच के जार में डाल दिया गया. फ़िर जार में पानी भरकर उसे गर्म किया जाने लगा. जार में ढक्कन नहीं लगाया गया था, ताकि जब पानी का गर्म ताप मेंढक की सहनशक्ति से बाहर हो जाए, तो वह कूदकर बाहर आ सके.

प्रारंभ में मेंढक शांति से पानी में बैठा रहा. जैसे पानी का तापमान बढ़ना प्रारंभ हुआ, मेंढक में कुछ हलचल सी हुई. उसे समझ में तो आ गया कि वो जिस पानी में बैठा है, वो हल्का गर्म सा लग रहा है. लेकिन कूदकर बाहर निकलने के स्थान पर वो अपनी शरीर की ऊर्जा बढ़े हुए तापमान से तालमेल बैठाने में लगाने लगा.

पानी थोड़ा और गर्म हुआ, मेंढक को पहले से अधिक बेचैनी महसूस हुई. लेकिन, वह बेचैनी उसकी सहनशक्ति की सीमा के भीतर ही थी. इसलिए वह पानी से बाहर नहीं कूदा, बल्कि अपने शरीर की ऊर्जा उस गर्म पानी में तालमेल बैठाने में लगाने लगा.

धीरे-धीरे पानी और ज्यादा गर्म होता गया और मेंढक अपने शरीर की अधिक ऊर्जा पानी के बढ़े हुए तापमान से तालमेल बैठाने में लगता रहा.

जब पानी उबलने लगा, तो मेंढक की जान पर बन आई. अब उसकी सहनशक्ति जवाब दे चुकी थे. उसने जार से बाहर कूदने के लिए अपने शरीर की शक्ति बटोरी, लेकिन वह पहले ही शरीर की समस्त ऊर्जा धीरे-धीरे उबलते पानी से तालमेल बैठाने में लगा चुका था. अब उसके शरीर में जार से बाहर कूदने की ऊर्जा शेष नहीं थी. वह जार से बाहर कूदने में नाकाम रहा और उसी जार में मर गया.

यदि समय रहते उसने अपनी शरीर की ऊर्जा का प्रयोग जार से बाहर कूदने में किया होता, तो वह जीवित होता.

कहानी से शिक्षा: 

दोस्तों, हमारे जीवन में भी ऐसा होता है. अक्सर परिस्थितियाँ विपरीत होने पर हम उसे सुधारने या उससे बाहर निकलने का प्रयास ना कर उससे तालमेल बैठाने में लग जाते है. हमारी आँख तब खुलती है, जब परिस्थितियाँ बेकाबू हो जाती है और हम पछताते रह जाते हैं कि समय रहते हमने कोई प्रयास क्यों नहीं किया. इसलिए प्रारंभिक अनुभव होते ही परिस्थितियाँ सुधारने की कार्यवाही प्रारंभ कर दे और जब समझ आ जाये कि अब इन्हें संभालना मुश्किल है, तो उससे बाहर निकल जायें. परिस्थितियों से लड़ना आवश्यक है, लेकिन समय रहते उससे बाहर निकल जाना बुद्धिमानी है.

16.जो चाहोगे सो पाओगे कहानी हिंदी में

एक साधु घाट किनारे अपना डेरा डाले हुए था. वहाँ वह धुनी रमा कर दिन भर बैठा रहता और बीच-बीच में ऊँची आवाज़ में चिल्लाता, “जो चाहोगे सो पाओगे!”

उस रास्ते से गुजरने वाले लोग उसे पागल समझते थे. वे उसकी बात सुनकर अनुसना कर देते और जो सुनते, वे उस पर हँसते थे.

एक दिन एक बेरोजगार युवक उस रास्ते से गुजर रहा था. साधु की चिल्लाने की आवाज़ उसके कानों में भी पड़ी – “जो चाहोगे सो पाओगे!” “जो चाहोगे सो पाओगे!”.

ये वाक्य सुनकर वह युवक साधु के पास आ गया और उससे पूछने लगा, “बाबा! आप बहुत देर से जो चाहोगे सो पाओगे  चिल्ला रहे हो. क्या आप सच में मुझे वो दे सकते हो, जो मैं पाना चाहता हूँ?”

साधु बोला, “हाँ बेटा, लेकिन पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम पाना क्या चाहते हो?”

“बाबा! मैं चाहता हूँ कि एक दिन मैं हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनूँ. क्या आप मेरी ये इच्छा पूरी कर सकते हैं?” युवक बोला.

“बिल्कुल बेटा! मैं तुम्हें एक हीरा और एक मोती देता हूँ, उससे तुम जितने चाहे हीरे-मोती बना लेना.” साधु बोला. साधु की बात सुनकर युवक की आँखों में आशा की ज्योति चमक उठी.

फिर साधु ने उसे अपनी दोनों हथेलियाँ आगे बढ़ाने को कहा. युवक ने अपनी हथेलियाँ साधु के सामने कर दी. साधु ने पहले उसकी एक हथेली पर अपना हाथ रखा और बोला, “बेटा, ये इस दुनिया का सबसे अनमोल हीरा है. इसे ‘समय’ कहते हैं. इसे जोर से अपनी मुठ्ठी में जकड़ लो. इसके द्वारा तुम जितने चाहे उतने हीरे बना सकते हो. इसे कभी अपने हाथ से निकलने मत देना.”

फिर साधु ने अपना दूसरा हाथ युवक की दूसरी हथेली पर रखकर कहा, “बेटा, ये दुनिया का सबसे कीमती मोती है. इसे ‘धैर्य’ कहते हैं. जब किसी कार्य में समय लगाने के बाद भी वांछित परिणाम प्राप्त ना हो, तो इस धैर्य नामक मोती को धारण कर लेना. यदि यह मोती तुम्हारे पास है, तो तुम दुनिया में जो चाहो, वो हासिल कर सकते हो.”

युवक ने ध्यान से साधु की बात सुनी और उन्हें धन्यवाद कर वहाँ से चल पड़ा. उसे सफ़लता प्राप्ति के दो गुरुमंत्र मिल गए थे. उसने निश्चय किया कि वह कभी अपना समय व्यर्थ नहीं गंवायेगा और सदा धैर्य से काम लेगा.

कुछ समय बाद उसने हीरे के एक बड़े व्यापारी के यहाँ काम करना प्रारंभ किया. कुछ वर्षों तक वह दिल लगाकर व्यवसाय का हर गुर सीखता रहा और एक दिन अपनी मेहनत और लगन से अपना सपना साकार करते हुए हीरे का बहुत बड़ा व्यापारी बना.

कहानी से शिक्षा: 

लक्ष्य प्राप्ति के लिए सदा ‘समय’ और ‘धैर्य’ नाम के हीरे-मोती अपने साथ रखें. अपना समय कभी व्यर्थ ना जाने दें और कठिन समय में धैर्य का दामन ना छोड़ें. सफ़लता अवश्य प्राप्त होगी|

निष्कर्ष(Conclusion)

दोस्तों इस पोस्ट में हमने आपको बहुत ही अच्छी  प्रेरणादायक कहानियां हिंदी में बताई है। आशा करते है आपने इन कहानियों से कुछ सीख ली हो और उन्हें अपने जीवन में उतारने की कोशिश करेंगे।

                                                              Thank You

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